श्रीवैष्णवधर्म के प्रबन्ध का उत्तरदायित्व साधारण सभा पर है | साधारण सभा द्वारा निर्वाचित कार्यकारिणी के तत्वावधान में वैष्णव धर्म का आन्तरिक प्रबन्ध होता है | इसमें निम्नांकित अधिकारी होते है |
- अध्यक्ष (सभापति)
- उपाध्यक्ष (उपसभापति)
- प्रबन्धक
- मन्त्री
- उपमन्त्री
- कोषाध्यक्ष
- सदस्य
यहां के अध्ययन करने वाले छात्र प्रत्येक विभाग में भाग लेने के लिए पूर्ण अर्ह होते हैं | सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से व्याकरण एवं साहित्य विषय में आचार्य तक मान्यता तथा मध्यमा स्तर तक उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद लखनऊ से मान्य्ता प्राप्त है |
योग्य तथा प्रतिभा सम्पन्न छात्रों को संस्था की ओर से विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती हैं | यहां के प्रवेश नियम निम्न प्रकार से हैं |
- इस महाविद्यालय में १२ वर्ष से अधिक के बच्चों का प्रवेश लिया जाता है |
- इस महाविद्यालय में बच्चों का निःशुल्क प्रवेश होता है |
- बच्चों को भोजन एंव आवास निःशुल्क दिया जाता हैं |
अपने बच्चों को सुयोग्य एवं सदाचारी बनाने हेतु वैष्णव धर्म की शिक्षा-दीक्षा से लाभ उठावें |
||श्री रामोबिजयतेतराम्||
श्रुत्वातं वैष्णवेभ्यश्चसर्व शास्त्र विशारदम् |
स्वयन्त द्दर्शनाकांक्षी वभूव स द्विजोत्त्मः||
भावार्थ - संसार में वैष्णव का तेज सबसे अधिक चमकता हैं सब शास्त्रों में निपुण वैष्णव धर्म हैं| उस काल से वैष्णव कुल भूषण अभिलाषी हुए |